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कंप्यूटरों का वर्गीकरण | Classification Of Computers

कंप्यूटरों का वर्गीकरण | Classification Of Computers
कंप्यूटरों का वर्गीकरण | Classification Of Computers


कंप्यूटरों का वर्गीकरण | Classification Of Computers

कंप्यूटरों का वर्गीकरण | Classification Of Computers: कम्प्यूटर का वर्गीकरण आकार एवं कार्य-पद्धति के आधार पर किया गया है। इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) का विकास जैक किल्बी ने किया था।

आकार के आधार पर कम्प्यूटर की वर्गीकरण

आकार के आधार पर कम्प्यूटर की वर्गीकरण : आकार के आधार पर कम्प्यूटरों का वर्गीकरण उनकी स्मृति-क्षमता (Memory) के आधार पर किया गया है : कम्प्यूटर का नाम और स्मृति-क्षमता

(i) माइक्रो-कम्प्यूटर या पर्सनल कम्प्यूटर 256 किलोबाइट (KB)

(ii) मिनी कम्प्यूटर 256 किलोबाइट से 12 मेगाबाइट (MB)

(ii) सुपर मिनी कम्प्यूटर 1 मेगाबाइट से 80 मेगाबाइट

(iv) मेनफ्रेम कम्प्यूटर 10 मेगाबाइट से 128 मेगाबाइट

(v) सुपर कम्प्यूटर - 8 मेगाबाइट से 512 मेगाबाइट।

अब 52 मेगाबाइट की स्मृति से अधिक स्मृतिवाले कम्प्यूटरों को सुपर कम्प्यूटर मान लिया गया है। यदि वह 500 मेगाफ्लॉप की क्षमता से कार्य कर सक। कंप्यूटरों का वर्गीकरण | Classification Of Computers.

कम्प्यूटर के प्रकार (Types of Computer)

कार्य-पद्धति के आधार पर कम्प्यूटर के मुख्य पाँच प्रकार हैं : कम्प्यूटर के प्रकारऔर विशेषताएँ:-

अकीय (Digital):- कम्प्यूटर यह सभी प्रकार की सूचनाओं को द्वि-आधारी में बदलकर अपना कार्य संपादित करता है। इनके द्वारा प्राप्त सूचनाएँ शत-प्रतिशत शुद्ध रहती हैं।

अनुरूप (Analogue):- कम्प्यूटर इसमें किसी भौतिक विधि या राशि को इलेक्ट्रॉनिक परिपथों की सहायता से विद्युत्-संकेतों में अनुरूपित किया जाता है। इस कम्प्यूटर की सूचनाएँ 99% तक शुद्ध रहती हैं।

संकर (Hybrid):- कम्प्यूटर इसमें अंकीय एवं अनुरूप दोनों कम्प्यूटरों की विशेषताओं का लाभ उठाया जाता है।

प्रकाशीय (Optical):- कम्प्यूटर प्रकाश-तंतु के तारों से संयोजित जा रहा है। प्रकाश की गति से तीन गणनाएँ इसके द्वारा संभव हो सकेंगी।

परमाणु (Atomic):- कम्प्यूटर इसका अभी विकास किया जा रहा है।

कम्प्यूटर का संक्षिप्त इतिहास

यांत्रिक कैलकुलेटर का उद्गम दो गणितज्ञोंब्लेज पास्कल (1623-62 .) और गॉटफ्रीड विल्हेम लेबिट्ज (1646-1716 .) के कार्यों में खोजा जा सकता है

लेकिन चार्ल्स बैवेज (1792-1871 .) ने जॉन नेपियर (1550-1617 .) द्वारा खोजे गए लघुगणक अंकनों को समाहित कर सकनेवाली कैलकुलेटिंग मशीन बनाने का विचार किया था। इसलिए चार्ल्स बैवेज को कम्प्यूटर के जनक के रूप में भी जाना जाता है।

17वीं सदी में स्कॉटिश गणितज्ञ जॉन नेपियर ने लघुगणक सिद्धांत का आविष्कार किया।

1640 के दशक में फ्रांसीसी वैज्ञानिक पास्कल ने गणनाओं को आसान बनाने के लिए कैलकुलेटर का आविष्कार किया।

1833 में ब्रिटिश वैज्ञानिक चार्ल्स बैवेज ने एनालिटिक इंजन (Analytic Engine) बनाया। इसी के आधार पर बाद में कम्प्यूटर का विकास हुआ। इसी कारण बैवेज को कम्प्यूटर का जन्मदाता कहा जाता है।

1937 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के हावर्ड एकिन के नेतृत्व में 'मार्क-I' कम्प्यूटर का निर्माण किया गया। यह सामान्यतः प्रथम कम्प्यूटर था।

1946 में पेंसिलवेनिया विश्वविद्यालय में प्रथम डिजिटल कम्प्यूटर बनाया गया। इसका नाम थाएनियाक (ENIAC : Electronic Numerical Indicator and Calculator) इसमें निर्वात् ट्यूबों का प्रयोग किया गया। इसका आकार 50x30x10 घनफुट था और वजन 30 टन।

1951 में प्रथम व्यावसायिक कम्प्यूटर यूनीवैक (UNIVAC: Universal AutomaticComputer)बना। यह पहला कम्प्यूटर था, जो पद,आंकिक और शाब्दिक सूचनाओं को समान रूप से प्रयोग में ला सकता था।

प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटर (Computers of first generation): निर्वात् ट्यूब (Vacuum tube) वाले कम्प्यूटरों को प्रथम पीढ़ी का कम्प्यूटर कहा गया। इनका आकार और वजन बहुत बड़ा और भारी होता था। साथ ही ये बहुत जल्दी गर्म हो जाया करता थे।

द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटर (Computers of second generation) : 1947 में साक्ले, बाडीन एवं वाल्टर ने ट्रांजिस्टर का आविष्कार किया। इससे कम्प्यूटरों में निर्वात् ट्यूबों का स्थान ट्यूबों ने लिया। परिणामस्वरूप कम्प्यूटरों का आकार छोटा हो गया और उसकी कार्य-क्षमता बढ़ गयी।

तृतीय पीढी के कम्प्यूटर (Computers of third generation) अर्द्धचालकों (Semi-conductors); जैसे-सिलिकॉन, जर्मेनियम बनी चिप और ट्रांजिस्टर के समायोजन से इंटीग्रेटेड तृतीय पीढ़ी कम्प्यूटर कहलाये। I.C.की मदद से कम्प्यूटर छोटे, प्रभावकारी एक सस्ते हो गये।

चतुर्थ पीढ़ी के कम्प्यूटर (Computers of fourth generation):: के अनुसंधाना से इंटीग्रेटेड सर्किट से लार्ज स्केल इंटीग्रेटेड साक (L.S.I.C.: Large Scale Integrated Circuit) बनाना संभव इससे कम्प्यूटर-जगत् में क्रांति गयी। 

इससे कम्प्यूटर का आकार वजन, ऊर्जा-खपत एवं दाम घटा तथा इसकी क्षमता में वृद्धि वर्तमान समय में दिखनेवाले कम्प्यूटर इसी पीढ़ी के हैं।

पंचम पीढ़ी के कम्प्यूटर (Computers of fifth generation): कम्प्यूटर स्मार्ट चिप, प्रोग्राम, मेमोरी आदि में हई प्रगति से कम्प्यूट में कृत्रिम बौद्धिकता से परिपूर्ण कम्प्यूटरों को पंचम श्रेणी का कम्प्यूटर कहा जा रहा है।

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